मानचित्र

डॉ. अजितडॉ. अजित9 Sept 1982

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मैं कहीं खो गई हूँ शायद

शायद इसलिए कहा

क्योंकि

अब मैं पता नहीं पूछ रही हूँ

पता पूछने वाला

ज़रूर एक दिन कहीं पहुँच ही जाता है

मुझे जहाँ या कहाँ जाना था

ये मैं ठीक से शायद बता भी दूँ

मगर क्यों जाना था

ये बता पाना मुश्किल होगा मेरे लिए

अनुमानों के ज़रिए एक चित्र बनाती हूँ मैं

चित्र में शायद जोड़ रही हूँ क्योंकि

रास्ता भूलने के कारण

चित्र की ध्वनि लग सकती है

कुछ-कुछ मानचित्र जैसी

उस चित्र में मैं हूँ तुम हो

मगर कोई दृश्य नहीं है

मसलन इस चित्र की कोई मनोदशा नहीं है

ये रास्ता भूले किसी दूसरे मुसाफ़िर से नहीं मिलवाता

यदि ऐसा करता तो शायद

मैं हँसते-हँसते रो पड़ती

मैं नाचते हुए उदास न होती

मैं रास्ता भूल गई हूँ

मैं कहीं खो गई हूँ

ये फ़िलहाल मुकम्मल बयान है मेरे लिए

जिसकी पुष्टि के लिए

कविता की शक्ल में जगह-जगह

'शायद' टाँक दिए हैं

किसी पार्टी वियर फॉर्मल शर्ट के एक्स्ट्रा बटन की तरह

मैं रास्ता भूल गई हूँ

इसलिए औपचारिक होकर मिटा रही हूँ

अपना थोड़ा भय

थोड़ा अपराधबोध

बुरा मत मानना

यदि मैं पूछूँ कई बार

कैसे हो!

वैसे भी

जो रास्ता भूल जाए

उसकी बात का क्या बुरा मानना भला।

डॉ. अजित
About the poet

डॉ. अजित

नई पीढ़ी के सुपरिचित कवि-गद्यकार। मूल नाम : अजित सिंह तोमर जन्म : 09/09/1982 | शामिली, उत्तर प्रदेश

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