जैसे

डॉ. अजितडॉ. अजित9 Sept 1982

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उसने कहा :

तुम्हें स्त्री से बात करनी नहीं आती

मैंने पूछा :

कैसे की जाती है स्त्री से बात?

ये किसी से पुरुष से पूछना

मुझसे नहीं : उसने हँसते हुए कहा

मेरे पास कोई ऐसा पुरुष नहीं है

जिससे ले सकूँ ये ज्ञान :

मैंने अपनी असमर्थता ज़ाहिर की

इस पर थोड़ा गंभीर होकर उसने कहा :

स्त्री से ठीक वैसे की जाती है बात

जैसे कोई रास्ता पूछता है मुसाफ़िर

जैसे बादल बरसता है

जंगल मे अलग और शहर में अलग

जैसे बच्चा करता है ज़िद

जैसे दर्द को छिपाता है एक नव-वयस्क

जैसे धरती से पूछा जाता है उसका जल-स्तर

मैंने कहा : यदि मैं

इस तरह न कर पाऊँ बात तो?

फिर एक स्त्री तुम्हें सुनती है

और मुस्कुराती है मन ही मन

और करती है ईश्वर से प्रार्थना

तुम्हें दुनियादारी से बचाने की

वो फिर नहीं सुन पाती

तुम्हारी कोई लौकिक बात

वो सौंपती है अपनी

अधिकतम सद्कामनाएँ

और ढेर सारा अमूर्त प्रेम

तुमसे एक दूरी की शक्ल में।

डॉ. अजित
About the poet

डॉ. अजित

नई पीढ़ी के सुपरिचित कवि-गद्यकार। मूल नाम : अजित सिंह तोमर जन्म : 09/09/1982 | शामिली, उत्तर प्रदेश

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