एक दिन सब ठीक हो जाएगा

डॉ. अजितडॉ. अजित9 Sept 1982

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वो दुनिया पर करती कोई तंज़

मुझे ख़ुद पर लगता था

वो करती किसी को ख़ारिज

बिखरने मेरा वजूद लगता था

उससे प्रशंसा की अपेक्षा से

लगभग मुक्त था मैं

मगर उसके कटाक्षों से

सतत भयातुर बना रहता था

अरसा बीत जाता था

उससे बतियाए हुए

मगर उसकी बातें हमेशा रहती थी

मेरे इर्द-गिर्द

इसलिए नहीं जानता मैं

क्या होता है अकेलापन

खुरदरे पहाड़ पर जमी हरी दूब

देख याद आता था उसका प्यार

अचानक से छाए बादल-सा था

उसका ग़ुस्सा

धूप को भागते देख

अक्सर घबरा जाता था मैं

उसकी नज़रों में सदा अच्छा

बनें रहने की कोई इच्छा नही थी मेरी

मगर, सच्चा ज़रूर बना रहना चाहता था

दुनिया की रीत की तरह

एक दूसरे का दिल दुखाकर

अलग नही होना चाहता था मैं

और अलग होने में

दिल दुखाना अनिवार्य शर्त थी

उससे अलग होने की कल्पना की

कल्पना से भी बचता था मैं

ये बातें उसे नहीं थीं मालूम

यह एक डरावनी बात ज़रूर थी

उससे रिश्ता अपवाद की शक्ल का था

इसलिए बचाता रहा उसे हमेशा किसी

वाद-विवाद से

उसका अन्न खाया था मैंने

उसके प्रेम को मीठे नहीं

नमक के ज़रिए

जानता था मैं

इसलिए हमेशा चाहता था

उसकी शंकाओं के अनुमानों में

बना रहे दाल में नमक जैसा संतुलन

उसे खोने के हज़ार बहानों

और खोने की फिसलन को

बुद्धि से विलग रख हमेशा बचाता था

यह कालजयी संभावना :

'एक दिन सब ठीक हो जाएगा'

डॉ. अजित
About the poet

डॉ. अजित

नई पीढ़ी के सुपरिचित कवि-गद्यकार। मूल नाम : अजित सिंह तोमर जन्म : 09/09/1982 | शामिली, उत्तर प्रदेश

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