कोरोना वायरस

धीरेंद्र नाथ तिवारीधीरेंद्र नाथ तिवारी

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अफ़वाह की तेज़ी से फैलता

एक परजीवी।

एक नाज़ी पर्यटक

एक संक्रामक सेलीब्रिटी।

एक बेइरादा क़ातिल

एक अनाहूत हड़कंप।

सर्वत्र उपस्थित प्रति-ब्रह्म

एक ढीठ भुनगा

बिलआख़िर, क़ुदरत का हरकारा।

एक फ़ेनॉमिना!

निजी-संसार की संकल्पना का

एक वायरस।

सामूहिकता के विचार पर कोई बुरी नज़र।

किसी से मिलना, लोमहर्षक! हाथ में लेना कोई हाथ, संभावित मृत्यु!

अपने साफ़-सुथरे हाथ धोते रहने की फ़िक्र। दिन रात...

ख़ुद को गुनहग़ार समझने की

किसी सूफ़ी रवायत की तरह।

डर का साइको वायरस!

संदेह की न्यूरल-फ़ाइरिंग!

दाहिने हाथ से डरता, बाँया हाथ।

अपने हाथ इच्छा-मृत्यु का

अभिशाप।

ईश्वर की खिल्ली उड़ाता, एक नन्हा असुर सिस्टम को धूल चटाती एक हवा।

एक मायावी युद्ध की सिहरन।

यह आश्वस्तिकर न रह जाना

कि बहुत सारे हैं यहाँ अपने लोग।

'बहुसंख्यकता' के यूँ अनिर्भयकारी

हो जाने का अचंभा।

एक अदृश्य लेकिन ठोस भय की अनुभूति

'नृकेंद्रित' विकास का मलाल।

'आधुनिकता' के प्रोजेक्ट की साँसत।

किसी नए-अनुक्रम के

रिहर्सल की थर-थरी।

'स्वतंत्रता' के अर्थ का आपद्-संकुचन

'नवउदारवाद' की कुटिलता का अनावरण

बाज़ार के मातम का ख़ौफ़

जनतंत्र के पत्तों में लगा युद्ध का रोग।

मनुष्यता का सोग।

एक राजनीतिक अपराधबोध।

एक त्रासद अनिश्चितता

किसी तानाशाह के मूड की तरह : अननुमेय।

एक निर्मम उद् गार का क्रियान्वयन।

एक निष्ठुर उपक्रम की वारदात

गोया, कैपिटलिस्ट मंसूबा!

'सभ्यता-रक्षक' जेनोसाइड!

एक नाज़ी आइडिया की विनाशलीला!

एक रहस्य! एक धोखा!

पूँजीवादी-संकट के उद्धार की कोई फ़ितरत।

अप्रतिरोध्य हाहाकार!

सभ्यता की छींक!

सांस्कृतिक बुख़ार!

दरिद्रता जैसी मारक कोई और चीज़।

अध्यात्म के सीने से रिस पड़ा,

श्रेष्ठताबोध का घाव।

पृथ्वी की साँस में गिर पड़ा

एक विषाद-अणु।

धीरेंद्र नाथ तिवारी
About the poet

धीरेंद्र नाथ तिवारी

कवि-लेखक और ग़ज़लकार।

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