मैं अभी-अभी माँ से मिलकर आया हूँ

चंद्रकांत देवतालेचंद्रकांत देवताले7 Nov 1936 – 14 Aug 2017

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वहाँ जैसे सब कुछ आईने के भीतर बसा था

मैं वही से अभी-अभी माँ के पास से आया हूँ

उसकी आँखों में आँसू नहीं थे

और वह वैसी परेशान खटकरम में जुती हुई नहीं थी

जैसे हम लोगों को बड़ा करते

इस दुनिया के उस चार कमरों वाले घर में ताज़िंदगी रही

उसने मुझसे कुछ भी जानने की कोशिश नहीं की

जैसे उसे पता था सब कुछ

उसने मुझे उन निगाहों से भी देखा

जो सारे अपराधों को मुआफ़ी देती है

एक बार मर चुकने के बाद वह अमर हो गई थी

मैं उसके लिए सिर्फ़ एक भटकी हुई गूँज था

जो कभी उसके अतीत की धड़कन थी

उस थोड़े से बेआवाज़ वक़्त में

पत्थर का एक घोड़ा और दो कुत्ते ज़रूर दिखे

कुत्तों के प्रति अपने प्रेम के कारण

हाथ फेरा एक के माथे पर

तो उसका उतना हिस्सा रेत की तरह बिखर गया

चाहते हुए भी माँ को नहीं छुआ मैंने

पता नहीं किन-किन दुखों-स्मृतियों से भरी थी उसकी देह

मैंने चाहा किसी भी तरह मैं देख पाऊँ

उसके स्तनों को चूसते हुए अपने होंठ

कैसे युद्ध, मंदी और फ़ाक़ामस्ती के उन दिनों में

चिपटे हुए उसके पेड़ का पक्षी बन जाता था मैं

मैं उसे नहीं बता पाया

कि मैं क़साईख़ाने में काम करते शाकाहारी की तरह

कैसे ज़िंदा हूँ इस दुनिया में

और शामिल हूँ उन्हीं में जो

अपनी करुणा की तबाही और

अपने साहस की हत्या के लिए

दूसरों को अपराधी समझ रहे हैं

मैं अभी-अभी माँ से मिलकर आया हूँ

और पुरखों की प्यास को चाट रहा हूँ

माँ से अपने ढंग की इस अकेली अधूरी मुलाक़ात के बारे में

कोई सबूत देना संभव नहीं

यह न तो सपने में हुई

और न इसके लिए मुझे मृतकों में शामिल होना पड़ा।

चंद्रकांत देवताले
About the poet

चंद्रकांत देवताले

सातवें दशक के समादृत कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : चंद्रकांत देवताले जन्म : 07/11/1936 | बैतूल, मध्य प्रदेश निधन : 14/08/2017 | इंदौर, मध्य प्रदेश समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि चंद्रकांत देवताले का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में 7 न…

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