वह रक्त सना गुब्बारा
सरक रहा है नीचे
हवा के विरुद्ध
झील और सागर में
गिर जाने को
चिड़ियों और अकेली लड़कियों के
भीतर से इक अनजाने
भय को ऊपर लाता
मुझे सरकाता
वह रक्त सना गुब्बारा
सरक रहा है नीचे
हवा के विरुद्ध
झील और सागर में
गिर जाने को
चिड़ियों और अकेली लड़कियों के
भीतर से इक अनजाने
भय को ऊपर लाता
मुझे सरकाता

सुपरिचित कवयित्री। मूल नाम : चंपा वैद जन्म : 13/09/1930 | पंजाब निधन : 23/07/2017
View profile & all 42 Poems / Stories