ख़ाली मुट्ठी

चंपा वैदचंपा वैद13 Sept 1930 – 23 Jul 2017

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आज लग रहा है संसार

खोखला

ख़ाली मुट्ठी की तरह

आज लगता है

चोर ले भागे हैं वह सब

जो था कल तक अपना

अब से फिर मुट्ठी भरने में

लग जाऊँगी

उन काँटे वाली चीज़ों से

जो पड़ी रह जाएँगी

यहीं

बिना डर

चंपा वैद
About the poet

चंपा वैद

सुपरिचित कवयित्री। मूल नाम : चंपा वैद जन्म : 13/09/1930 | पंजाब निधन : 23/07/2017

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