तुम एक लंबा रास्ता लगते हो
इतने पेड़ पौधे
इतने जनपद
इतनी सारी भाषाएँ
बातें...
जानने की कोशिश करती हूँ
याद रखने की भी
मन में छाप लेने की भी
फिर भी भटक जाती हूँ
एक अजनबी की तरह भूल जाती हूँ
रास्ता सफ़र करने के लिए होता है
घर बसाने के लिए नहीं...
तुम एक लंबा रास्ता लगते हो
इतने पेड़ पौधे
इतने जनपद
इतनी सारी भाषाएँ
बातें...
जानने की कोशिश करती हूँ
याद रखने की भी
मन में छाप लेने की भी
फिर भी भटक जाती हूँ
एक अजनबी की तरह भूल जाती हूँ
रास्ता सफ़र करने के लिए होता है
घर बसाने के लिए नहीं...

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।
View profile & all 37 Poems / Stories