अजनबी की तरह

बेबी शॉबेबी शॉ

1 min read · 12.4K reads

तुम एक लंबा रास्ता लगते हो

इतने पेड़ पौधे

इतने जनपद

इतनी सारी भाषाएँ

बातें...

जानने की कोशिश करती हूँ

याद रखने की भी

मन में छाप लेने की भी

फिर भी भटक जाती हूँ

एक अजनबी की तरह भूल जाती हूँ

रास्ता सफ़र करने के लिए होता है

घर बसाने के लिए नहीं...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

View profile & all 37 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like