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बूँदों के बीच प्यास - बहादुर पटेल
तुम नग़्मा-ए-माह हो अन्जुम हो तुम सोज़-ए-तमन्ना क्या जानोतुम दर्द-ए-मुहब्बत क्या समझो तुम दिल का तड़पना क्या जानो
शब्द - बहादुर पटेल
हमारे पास शब्दों की कमी बहुतयही वज़ह है कि
भ्रम - बहादुर पटेल
यह जो समय का एक लम्बा-सा हिस्सादूर तक दिखाई दे रहा है
दोस्त - बहादुर पटेल
दोस्त! तुम्हारा जो यह दोस्ती का ढंग हैयह तुम जो मेरे साथ
स्मृतियाँ हैं ये भी - बहादुर पटेल
पुरानी शिला के नीचे से निकल आतीबिच्छू-सी
बहादुर पटेल: Quick Answers
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Poems & Stories by बहादुर पटेल
बूँदों के बीच प्यास - बहादुर पटेल
तुम नग़्मा-ए-माह हो अन्जुम हो तुम सोज़-ए-तमन्ना क्या जानोतुम दर्द-ए-मुहब्बत क्या समझो तुम दिल का तड़पना क्या जानो
शब्द - बहादुर पटेल
हमारे पास शब्दों की कमी बहुतयही वज़ह है कि
भ्रम - बहादुर पटेल
यह जो समय का एक लम्बा-सा हिस्सादूर तक दिखाई दे रहा है
दोस्त - बहादुर पटेल
दोस्त! तुम्हारा जो यह दोस्ती का ढंग हैयह तुम जो मेरे साथ
स्मृतियाँ हैं ये भी - बहादुर पटेल
पुरानी शिला के नीचे से निकल आतीबिच्छू-सी
सामंजस्य - बहादुर पटेल
तुम्हारा मुस्कुराना इस तरहदिल में हलचल पैदा करता है
सुबह - बहादुर पटेल
ऎन सुबह चाँद बहुत सुन्दर लगाजाते-जाते
बूँदों के बीच प्यास
बूँद-बूँद टपकता पानीरात में ऐसा संगीत
मैं इन दिनों बहुत डरा हुआ हूँ
डरा हुआ हूँ मैं इन दिनोंयह डर कविता लिखने से पहले का है
दिल्ली के कवि
मैंने ख़रगोश की तरह सोचाऔर दौड़ पड़ा कछुए की तरह
बीज
उठो हवाधरती से आसमान की ओर बहो
दृश्य
मैंने पेड़ को देखामैं पेड़ की तरह हरा हो गया
Selected Quotes by बहादुर पटेल (चुनिंदा उद्धरण)
तुम नग़्मा-ए-माह हो अन्जुम हो तुम सोज़-ए-तमन्ना क्या जानोतुम दर्द-ए-मुहब्बत क्या समझो तुम दिल का तड़पना क्या जानोयह जो समय का एक लम्बा-सा हिस्सादूर तक दिखाई दे रहा हैदोस्त! तुम्हारा जो यह दोस्ती का ढंग हैयह तुम जो मेरे साथहमारे पास शब्दों की कमी बहुतयही वज़ह है किपुरानी शिला के नीचे से निकल आतीबिच्छू-सीतुम्हारा मुस्कुराना इस तरहदिल में हलचल पैदा करता हैVideos on बहादुर पटेल
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