उठो हवा
धरती से आसमान की ओर बहो
बहो कि तुम्हारी तासीर है यह
कुलबुला रहे हैं बीज
ले चलो
बिखेर दो
इस धरती के कोने-कोने में
विचारों की काटना चहाता हूँ फ़सल
तुम्हारे अंतस की पीड़ा
चाहता हूँ बाँटना
आग बनकर
फैल जाना चाहते हैं बीज।
उठो हवा
धरती से आसमान की ओर बहो
बहो कि तुम्हारी तासीर है यह
कुलबुला रहे हैं बीज
ले चलो
बिखेर दो
इस धरती के कोने-कोने में
विचारों की काटना चहाता हूँ फ़सल
तुम्हारे अंतस की पीड़ा
चाहता हूँ बाँटना
आग बनकर
फैल जाना चाहते हैं बीज।

तुम नग़्मा-ए-माह हो अन्जुम हो तुम सोज़-ए-तमन्ना क्या जानोतुम दर्द-ए-मुहब्बत क्या समझो तुम दिल का तड़पना क्या जानो
हमारे पास शब्दों की कमी बहुतयही वज़ह है कि
यह जो समय का एक लम्बा-सा हिस्सादूर तक दिखाई दे रहा है
दोस्त! तुम्हारा जो यह दोस्ती का ढंग हैयह तुम जो मेरे साथ
पुरानी शिला के नीचे से निकल आतीबिच्छू-सी