बीज

बहादुर पटेलबहादुर पटेल

1 min read · 12.4K reads

उठो हवा

धरती से आसमान की ओर बहो

बहो कि तुम्हारी तासीर है यह

कुलबुला रहे हैं बीज

ले चलो

बिखेर दो

इस धरती के कोने-कोने में

विचारों की काटना चहाता हूँ फ़सल

तुम्हारे अंतस की पीड़ा

चाहता हूँ बाँटना

आग बनकर

फैल जाना चाहते हैं बीज।

बहादुर पटेल
About the poet

बहादुर पटेल

View profile & all 22 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like