अन्न को भूख लगती है
पानी को प्यास
भाव को भी भावनाओं की ज़रूरत होती है
फलों को भी स्वाद चाहिए
अग्नि को भी आग
बहते हुए नीर को भी
नीर का आवेग चाहिए
बारिश को भी चाहिए उसे भिगोने वाला पानी
कंबल को भी गर्मी चाहिए
स्रष्टा को भी सार चाहिए
स्रष्टा को भी भाव
ज्ञान को भी सबद चाहिए
मुझे भी कुछ चाहिए
पर क्या चाहिए
यह न मुझे पता है
और न औरों को








