जहाँ बिल्ली को खदेड़ता
दिख जाएगा ख़रगोश
वहीं अपना घर बनाऊँगा
वहीं शीत वसंत लाऊँगा
वहीं लगाऊँगा
सेब, नारंगी, संतरा
वहाँ कामधेनु पोसूँगा,
वहीं कवियों, बुलाऊँगा तुम्हें
और काव्य-पाठ कराऊँगा
जहाँ बिल्ली भागती होगी
और पीछे से खदेड़ता होगा
ख़रगोश...
जहाँ बिल्ली को खदेड़ता
दिख जाएगा ख़रगोश
वहीं अपना घर बनाऊँगा
वहीं शीत वसंत लाऊँगा
वहीं लगाऊँगा
सेब, नारंगी, संतरा
वहाँ कामधेनु पोसूँगा,
वहीं कवियों, बुलाऊँगा तुम्हें
और काव्य-पाठ कराऊँगा
जहाँ बिल्ली भागती होगी
और पीछे से खदेड़ता होगा
ख़रगोश...

सुपरिचित कवि-विचारक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : बद्री नारायण जन्म : 05/10/1965
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