हर तरफ दुख-दर्द के तिलचट्टे पसरे हैं
अगर सौभाग्यवश कोई ख़ुशी कहीं दिखती भी है
तो वहाँ तक पहुँचते-पहुँचते
वह भी संक्रमित हो जाती है।
पहुँचना ही संक्रमण है शायद!
मैं ब्रह्मांड की हर दृश्य-अदृश्य चीज़ को
हमेशा-हमेशा ख़ुश देखना चाहता था,
इसलिये मैं जहाँ कहीं भी पहुँचा
ख़ुद को बीच रास्ते ही पाया।








