मस्तराम कहीं से भी भकचोन्हर नहीं है
वह प्रेम में देह के लिए अलग से
एक कोरोना-काल की माँग करता है
जिसमें तलुए से पेशानी तक पहुँचने के क्रम में
चालान कटवाते-कटवाते उसके दिल की जेब में
सिर्फ़ और सिर्फ़ भूख बचे
भूख हत्या की
आत्महत्या ख़ातिर उकसाने की भूख
मासूमों को धर्म और राष्ट्रवाद की अफ़ीम चटाकर
नरभक्षियों में तब्दील करने की भूख
और भूख के पिछवाड़े पर हाय रे हाय रोटियों के डंडे
रोटियाँ साली चीन की चक्की से कंडोम बेचने
यहाँ तक पहुँची
और स्वयं बाँझ होने की मौत मारी गईं
इस दौरान कई दफ़े जिस्म पर नेवले बन बैठे
प्रेम नामक पहरेदार की वह गालियाँ सुनता है
लाठियाँ खाता है
और लहूलुहान हो जाता है
लहूलुहान होना संक्रमण है
उसके कमरे में उपस्थित प्रेम से जुड़ी सारी चीज़ें संक्रमित हैं
सिवाय इसके कि वह संभोगरत है।








