प्रेयसी को बाँहों में
लेते हुए
इतनी उष्णता तो
उत्पन्न होनी ही चाहिए
कि इस दोमुँहे समाज का
जातीय दंभ पिघल सके।
प्रेयसी को बाँहों में
लेते हुए
इतनी उष्णता तो
उत्पन्न होनी ही चाहिए
कि इस दोमुँहे समाज का
जातीय दंभ पिघल सके।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। मूल नाम : आशीष यादव जन्म : 09/10/1998 | ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश
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