आपको आज़ादी है - अरुण देव

अरुण देवअरुण देव16 Sept 1972

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आपको हक़ है अभिव्यक्ति का
मूलभूत है
अखण्ड है

हम देखेंगे कि आपने क्या कहा है
जन को आपके लेखन से कोई ख़तरा तो नहीं ?

आपको हक़ है अपने धर्म के प्रचार-प्रसार-संरक्षण का

दबाव में जो लोग बदल रहें हैं अपना ईमान
उनकी सूचियाँ हैं हमारे पास
अच्छे से जाँच पड़ताल की जाएगी

ये लालची लोग !

आपको हक़ है रँगों का
स्वाद का
साथी का

हम परखेंगे कि क्या पका है पतीले में आपके
और यह प्रेम
कोई षड्यन्त्र तो नहीं इस राष्ट्र राज्य के ख़िलाफ
रँग भी भेद खोलते हैं

आप कहीं भी रह सकते हैं
यह देश आपका है
उद्यम आप जो चाहें करें

यहाँ यहाँ और यहाँ आप हमेशा बाहरी ही रहेंगे
और तब तक आप दिखें बिलकुल भी नहीं
जगह न घेरें

आपसे उम्मीद है कि आप वैज्ञानिक चेतना का प्रचार-प्रसार करेंगे

सावधान ! इसके लिए आपकी हत्या की जाएगी

राष्ट्र किसी भी और किसी के भी
मज़हबी मसलों में निरपेक्ष रहेगा

मन्दिर तो वहीं बनेगा
और सकीना का तलाक़ कोर्ट के बाहर तय है
यह तय हो

हर नागरिक की गरिमा अक्षुण रखी जाएगी

हंसे नहीं

यह हंसी राष्ट्रद्रोह है
जज साहब के निर्णय देने से पहले वक़ील साहबान आपको सज़ा देंगे ।
अरुण देव
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अरुण देव

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    शिक्षा : जवाहरलाल नेहरू विश्व-विद्यालय(नई दिल्ली) से एम.फिल.,पी.एच.डी. ,विश्व-विद्यालय अनुदान आयोग की फेलोशिप के अंतर्गत मोहन राकेश और आचार्य महावीरप्रसाद द्दिवेदी पर शोध कार्य, क्या तो समय (कविता-संग्रह) 2004 भारतीय ज्ञानपीठ,नई दिल्ली, कुछ आलोचनात्मक लेख, संस्कृति,उपनिवेश और हिंदी आलोचना बहुवचन-८, राष्ट्र की अवधारणा, भारत का अतीत और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,बहुवचन-11,उपनिवेश और हिंदी का स्वरूप,बहुवचन -२५ ,Mahatma Gandi international Hindi University,Verdha....... हिंदी नवरत्न.

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