About आरसी
मूल नाम : रूपम चोपड़ा जन्म : महाराष्ट्र आरसी पेशे से कम्प्यूटर इंजिनीयर हैं और लम्बे आरसे तक सॉफ्टवेयर सर्विस में रहने के बाद शायरी की तरफ मुड़ी हैं | उनकी मादरी ज़बान मराठी है लेकिन वे उर्दू और हिंदी में दोहे, सरसी, ग़ज़लें नज़्में, कविताएं लिखती हैं | बेहद संजीदा शायरी करती हैं , अज़्म और हौसले की बात करती है | उनकी शायरी,…
Selected Quotes
Poetry & Stories
दिन के सारे कारी लम्हे रो बैठे
दिन के सारे कारी लम्हे रो बैठेयाद में उस की बैठे बैठे रो बैठे
पलक मैं अपनी पकड़ न पाई
पलक मैं अपनी पकड़ न पाईक़रीब थी सो नज़र न आई
इंकार- नज़्म
पानी जम कर हुआ रूपहलाबर्फ़ है लेकिन सर्द नहीं है
शीर्षक - नज़्म
एक बदन था एक था सायाजुम्बिश भर से थिरके काया
दस्तक - नज़्म
दर्द के गहरे सन्नाटे मेंक़रिया-ए-जाँ के
About आरसी
मूल नाम : रूपम चोपड़ा
जन्म :महाराष्ट्र
आरसी पेशे से कम्प्यूटर इंजिनीयर हैं और लम्बे आरसे तक सॉफ्टवेयर सर्विस में रहने के बाद शायरी की तरफ मुड़ी हैं | उनकी मादरी ज़बान मराठी है लेकिन वे उर्दू और हिंदी में दोहे, सरसी, ग़ज़लें नज़्में, कविताएं लिखती हैं | बेहद संजीदा शायरी करती हैं , अज़्म और हौसले की बात करती है |
उनकी शायरी, दोहे और नज़्म एक तरह का ‘पोर्टल’ खोलते हैं । आरसी की रचनाओं का यह ‘पोर्टल’ जहाँ एक तरफ़ आस-पास की तमाम मौजूदगियों की निशानदेही करता है, वहीं दूसरी तरफ़ जाने किस-किस तरह की ना-मौजूदगियों की शिनाख्त़ भी| इन्हीं मौजूद और ना-मौजूद के बीच आरसी की शायरी कभी इश्क़ को इबादत के मुकाम पर ले जाती है तो कभी विज्ञान के सहारे सूफियाना फ़लसफ़ों के अनचिन्हे वरक पलटती है।
उनके कलाम की वुसअत सिंगार, वीररस से लेकर विज्ञान, गणित, आधुनिकता की मायानगरी से होते हुए तसव्वुफ़, साधना और मुक्ति के अंतिम सत्य का फासला तय कर जाती है … ”सरे-आईना मेरा अक्स है, पसे-आईना कोई और” की उलझन से परे।
आरसी: Quick Answers
Who is आरसी?
मूल नाम : रूपम चोपड़ा जन्म : महाराष्ट्र आरसी पेशे से कम्प्यूटर इंजिनीयर हैं और लम्बे आरसे तक सॉफ्टवेयर सर्विस में रहने के बाद शायरी की तरफ मुड़ी हैं | उनकी मादरी ज़बान मराठी है लेकिन वे उर्दू और हिंदी में दोहे, सरसी, ग़ज़लें नज़्में, कविताएं लिखती हैं | बेहद संजीदा शायरी करती हैं , अज़्म और हौसले की बात करती है | उनकी शायरी,…
Where can I read आरसी's poetry?
Kavishala has 5 poems and stories by आरसी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by आरसी
दिन के सारे कारी लम्हे रो बैठे
दिन के सारे कारी लम्हे रो बैठेयाद में उस की बैठे बैठे रो बैठे
पलक मैं अपनी पकड़ न पाई
पलक मैं अपनी पकड़ न पाईक़रीब थी सो नज़र न आई
इंकार- नज़्म
पानी जम कर हुआ रूपहलाबर्फ़ है लेकिन सर्द नहीं है
शीर्षक - नज़्म
एक बदन था एक था सायाजुम्बिश भर से थिरके काया
दस्तक - नज़्म
दर्द के गहरे सन्नाटे मेंक़रिया-ए-जाँ के
Selected Quotes by आरसी (चुनिंदा उद्धरण)
पलक मैं अपनी पकड़ न पाईक़रीब थी सो नज़र न आईदर्द के गहरे सन्नाटे मेंक़रिया-ए-जाँ केपानी जम कर हुआ रूपहलाबर्फ़ है लेकिन सर्द नहीं हैएक बदन था एक था सायाजुम्बिश भर से थिरके कायादिन के सारे कारी लम्हे रो बैठेयाद में उस की बैठे बैठे रो बैठेVideos on आरसी
Loading videos…
Books by आरसी
Loading books…








