हमारी मेहनत
हमारे गहने हैं,
हम अपना श्रम बेचते हैं,
अपनी आत्मा नहीं,
और तुम क्या लगा पाओगे हमारी क़ीमत?
तुम हमें हमारा हक़ नहीं देते,
क्योंकि तुम डरते हो,
तुम डरते हो
हम निहत्थों से,
तुम मुफ़्त खाने वाले हो,
तुम हमें लाठी और,
बन्दूक की नोक पे,
रखते हो
लेकिन याद रक्खो,
हम अगर असलहे उठा लेंगे,
तो हम दमन नहीं,
फ़ैसला करेंगे
(रचनाकाल: 2016)
हमारे गहने हैं,
हम अपना श्रम बेचते हैं,
अपनी आत्मा नहीं,
और तुम क्या लगा पाओगे हमारी क़ीमत?
तुम हमें हमारा हक़ नहीं देते,
क्योंकि तुम डरते हो,
तुम डरते हो
हम निहत्थों से,
तुम मुफ़्त खाने वाले हो,
तुम हमें लाठी और,
बन्दूक की नोक पे,
रखते हो
लेकिन याद रक्खो,
हम अगर असलहे उठा लेंगे,
तो हम दमन नहीं,
फ़ैसला करेंगे
(रचनाकाल: 2016)








