अचानक - अदनान कफ़ील दरवेश

अदनान कफ़ील दरवेशअदनान कफ़ील दरवेश30 Sept 1994

3 min read · 12.4K reads

वो अचानक नहीं आता
बता कर ही आता है

क्योंकि उसे मालूम है
कि मुझे
किसी चीज़ का अचानक होना
कोई ख़ास पसन्द नहीं
 
मुझे
वो सुख
ज़्यादा प्रिय है
जो अपनी
ख़बर पहले भिजवा दे

और दुःख
जो धीरे-धीरे
अन्धकार में उतरते हों

और जब
मैं उससे कहता हूँ —
..सुनो !
मुझे मृत्यु भी
धीरे-धीरे ही चाहिए..
तो वो
कई-कई रोज़
मेरे घर नहीं आता
अचानक भी नहीं !

(रचनाकाल: 2016)
अदनान कफ़ील दरवेश
About the poet

अदनान कफ़ील दरवेश

View profile & all 73 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like