उर्फी आफ़ाक़ी, poet
Sootradhar · Author

उर्फी आफ़ाक़ी

उर्फी आफ़ाक़ी

22 September 1936आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत

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Selected Quotes

फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइएयकसर जहान ही को न जब तक डुबोइए
— उर्फी आफ़ाक़ी
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बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता थाभेद गहरे पानियों के चुपके चुपके खोलता था
— उर्फी आफ़ाक़ी
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Poetry & Stories

  1. फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइए - उर्फी आफ़ाक़ी

    फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइएयकसर जहान ही को न जब तक डुबोइए

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  2. बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता था - उर्फी आफ़ाक़ी

    बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता थाभेद गहरे पानियों के चुपके चुपके खोलता था

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  3. रवाँ दवाँ सू-ए-मंज़िल है क़ाफ़िला कि जो था - उर्फी आफ़ाक़ी

    रवाँ दवाँ सू-ए-मंज़िल है क़ाफ़िला कि जो थावही हनूज़ है यक-दश्त़ फ़ासला कि जो था

    2 min read · 12.3K reads
  4. वो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगा - उर्फी आफ़ाक़ी

    वो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगाबस एक छलावे सा कोई दम को मिलेगा

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  5. सबा से आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ को - उर्फी आफ़ाक़ी

    सबा से आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ कोबुला रहा है मिरी ख़ूँ का ज़ाइका मुझ को

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