Selected Quotes
Poetry & Stories
फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइए - उर्फी आफ़ाक़ी
फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइएयकसर जहान ही को न जब तक डुबोइए
बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता था - उर्फी आफ़ाक़ी
बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता थाभेद गहरे पानियों के चुपके चुपके खोलता था
रवाँ दवाँ सू-ए-मंज़िल है क़ाफ़िला कि जो था - उर्फी आफ़ाक़ी
रवाँ दवाँ सू-ए-मंज़िल है क़ाफ़िला कि जो थावही हनूज़ है यक-दश्त़ फ़ासला कि जो था
वो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगा - उर्फी आफ़ाक़ी
वो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगाबस एक छलावे सा कोई दम को मिलेगा
सबा से आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ को - उर्फी आफ़ाक़ी
सबा से आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ कोबुला रहा है मिरी ख़ूँ का ज़ाइका मुझ को
उर्फी आफ़ाक़ी: Quick Answers
When was उर्फी आफ़ाक़ी born?
उर्फी आफ़ाक़ी was born on 22 September 1936. Associated place: आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत.
Where can I read उर्फी आफ़ाक़ी's poetry?
Kavishala has 5 poems and stories by उर्फी आफ़ाक़ी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by उर्फी आफ़ाक़ी
फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइए - उर्फी आफ़ाक़ी
फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइएयकसर जहान ही को न जब तक डुबोइए
बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता था - उर्फी आफ़ाक़ी
बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता थाभेद गहरे पानियों के चुपके चुपके खोलता था
रवाँ दवाँ सू-ए-मंज़िल है क़ाफ़िला कि जो था - उर्फी आफ़ाक़ी
रवाँ दवाँ सू-ए-मंज़िल है क़ाफ़िला कि जो थावही हनूज़ है यक-दश्त़ फ़ासला कि जो था
वो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगा - उर्फी आफ़ाक़ी
वो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगाबस एक छलावे सा कोई दम को मिलेगा
सबा से आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ को - उर्फी आफ़ाक़ी
सबा से आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ कोबुला रहा है मिरी ख़ूँ का ज़ाइका मुझ को
Selected Quotes by उर्फी आफ़ाक़ी (चुनिंदा उद्धरण)
फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइएयकसर जहान ही को न जब तक डुबोइएबस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता थाभेद गहरे पानियों के चुपके चुपके खोलता थारवाँ दवाँ सू-ए-मंज़िल है क़ाफ़िला कि जो थावही हनूज़ है यक-दश्त़ फ़ासला कि जो थावो ध्यान की राहों में जहाँ हम को मिलेगाबस एक छलावे सा कोई दम को मिलेगासबा से आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ कोबुला रहा है मिरी ख़ूँ का ज़ाइका मुझ कोVideos on उर्फी आफ़ाक़ी
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