बादलों को सींग पर उठाए
खड़ा है आकाश की पुलक के नीचे
एक बूँद के अचानक गिरने से
देर तक सिहरती रहती है उसकी त्वचा
देखता हुआ उसे
भीगता हूँ मैं
देर तक ।
बादलों को सींग पर उठाए
खड़ा है आकाश की पुलक के नीचे
एक बूँद के अचानक गिरने से
देर तक सिहरती रहती है उसकी त्वचा
देखता हुआ उसे
भीगता हूँ मैं
देर तक ।

Uday Prakash is a Hindi poet, scholar, journalist, translator and short story writer from India. He has worked as administrator, editor, researcher, and TV director. He writes for major dailies and periodicals as a freelancer. He has also received several awa…
View profile & all 19 Poems / Storiesएक जनवरी, 1989 को सफ़दर की ह्त्या की स्मृति में लिखी गई कवितावे कहीं गए नहीं हैं
तिब्बत से आये हुएलामा घूमते रहते हैं
अब से तकरीबन पचास साल हो गए होंगेजब कहा जाता है कि गांधी जी ने अपने अनुयायियों से कहीं कहा था
पीपल होतीं तुमपीपल, दीदी
एक सफ़ेद बादलउतर आया है नीचे