केशव , कहि न जाइ का कहिये

TulsidasTulsidas13 Aug 1497 – 1 Aug 1623

1 min read · 14.9K reads

केशव , कहि न जाइ का कहिये ।
देखत तव रचना विचित्र अति ,समुझि मनहिमन रहिये ।
शून्य भीति पर चित्र ,रंग नहि तनु बिनु लिखा चितेरे ।
धोये मिटे न मरै भीति, दुख पाइय इति तनु हेरे।
रविकर नीर बसै अति दारुन ,मकर रुप तेहि माहीं ।
बदन हीन सो ग्रसै चराचर ,पान करन जे जाहीं ।
कोउ कह सत्य ,झूठ कहे कोउ जुगल प्रबल कोउ मानै ।
तुलसीदास परिहरै तीनि भ्रम , सो आपुन पहिचानै ।

 

Tulsidas
About the poet

Tulsidas

Tulsidas (1497–1623), also known as Goswami Tulsidas, was a Ramanandi Vaishnava saint and poet, renowned for his devotion to the deity Rama. He wrote several popular works in Sanskrit and Awadhi, but is best known as the author of the epic Ramcharitmanas, a r…

View profile & all 26 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like

ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगाये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगालिबास-ए-ज़िंदगी फट जाएगा मैला नहीं होगा— मुनव्वर रानाचले मक़्तल की जानिब और छाती खोल दी हम नेचले मक़्तल की जानिब और छाती खोल दी हम नेबढ़ाने पर पतंग आए तो चर्ख़ी खोल दी हम ने— मुनव्वर रानाकुछ नहीं चाहने वाली लड़कीसोलह की यह लड़की दो-तीन साल पहले तकपेड़-पौधों पर रखती थी पाँव— ऐश्वर्य राजआंबेडकर“तुम्हारे दीन मुखों को देखकरकरुणा भरे स्वरों को सुनकर— बी. गोपाल रेड्डीमेरा और मेरी पृथ्वी का(लंबी कविता के कुछ अंश)वैसा ही हूँ, दुख मेरी गोद का बच्चा, बार-बार— हीरेन भट्टाचार्यतालाब-1मैं क्षिति तल परतुम्हारे सुख-दुख का— ब्रजरतन जोशी