सुन मन मूढ सिखावन मेरो

TulsidasTulsidas13 Aug 1497 – 1 Aug 1623

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सुन मन मूढ सिखावन मेरो।
हरिपद विमुख लह्यो न काहू सुख,सठ समुझ सबेरो॥
बिछुरे ससि रबि मन नैननि तें,पावत दुख बहुतेरो।
भ्रमर स्यमित निसि दिवस गगन मँह,तहँ रिपु राहु बडेरो॥
जद्यपि अति पुनीत सुरसरिता,तिहुँ पुर सुजस घनेरो।
तजे चरन अजहूँ न मिट नित,बहिबो ताहू केरो॥
छूटै न बिपति भजे बिन रघुपति ,स्त्रुति सन्देहु निबेरो।
तुलसीदास सब आस छाँडि करि,होहु राम कर चेरो॥

 

Tulsidas
About the poet

Tulsidas

Tulsidas (1497–1623), also known as Goswami Tulsidas, was a Ramanandi Vaishnava saint and poet, renowned for his devotion to the deity Rama. He wrote several popular works in Sanskrit and Awadhi, but is best known as the author of the epic Ramcharitmanas, a r…

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