मौसम की तरह पतन

त्रिभुवनत्रिभुवन

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वसंत की तरह

व्यभिचार

ग्रीष्म की तरह

मित्रघात

वर्षा की तरह

वचनभंग

शरद की तरह

ढीठता

हेमंत की तरह

चाटुकारिता

और शिशिर की तरह

पेट से परास्त हो रही है

रिश्तों की ऊष्मा

मौसम की तरह आ रहा है पतन।

त्रिभुवन
About the poet

त्रिभुवन

सुपरिचित कवि-लेखक और पत्रकार।

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