वसंत की तरह
व्यभिचार
ग्रीष्म की तरह
मित्रघात
वर्षा की तरह
वचनभंग
शरद की तरह
ढीठता
हेमंत की तरह
चाटुकारिता
और शिशिर की तरह
पेट से परास्त हो रही है
रिश्तों की ऊष्मा
मौसम की तरह आ रहा है पतन।
वसंत की तरह
व्यभिचार
ग्रीष्म की तरह
मित्रघात
वर्षा की तरह
वचनभंग
शरद की तरह
ढीठता
हेमंत की तरह
चाटुकारिता
और शिशिर की तरह
पेट से परास्त हो रही है
रिश्तों की ऊष्मा
मौसम की तरह आ रहा है पतन।

कुछ लोग कहते हैं इस देश में लोग रहते हैंमुझे लगता है, इस देश में सिर्फ़ एक संख्या भर रहती है
क्या यह सिर्फ़ मेरा सपना था?क्या मेरे भीतर एक दिव्य तत्त्व की अनुगूँज थी?
बात ऐसी है कि एक दिनइस धरती पर एक लहर चली
लौटते पत्र के साथकुछ बादल भेजना
एक दिन एक लड़की मेरे दफ़्तर आईऔर बोली : मेरी ख़बर छाप दो