आज़ाद हिन्द फौज

Tilok Chand MehroomTilok Chand Mehroom1 Jul 1887 – 6 Jan 1966

2 min read · 13.2K reads

अय जैसे-सरफ़रोशे-जवानाने-ख़ुशनिहाद
सीने पे तेरे कुंद हुई तेग़े-इश्तिदाद
ग़ुर्बत में तूने दी है शुजाअत की ख़ूब दाद
अक़्वामे-दहर करती है ज़ुरअत पे तेरी साद
तू कामराँ रहे, तिरे दुश्‍मन हों नामुराद
हिन्‍दोस्‍ताँ की फ़ौजे-ज़फ़र मौज ज़िन्‍दाबाद

दरिया-ओ-दश्‍त-ओ-कोह में तेरा बिगुल बजे
जिसकी सदा से गुम्‍बदे-गर्दूं भी गूँज उठे
मैदाँ में मौत भी जो मुजस्‍सम हो सामने
तेरे दिलावरों के न हों पस्‍त हौसले
हो बल्कि उसका और भी तोशे-अमल ज़ियाद
हिन्‍दोस्‍ताँ की फ़ौजे-ज़फ़र मौज ज़िन्‍दाबाद

परदेस में जो खेत रहे हैं जवाँ तिरे
हैं दफ़्न ज़ेरे-ख़ाक ख़ज़ाने वहाँ तिरे
बर्मा के जंगलों में लहू के निशाँ तिरे
नक़्शे-दवाम हैं वह तहे-आस्‍माँ तिरे
ता रोजे-हश्र अहले-वतन को रहेंगे याद
हिन्‍दोस्‍ताँ की फ़ौजे-ज़फ़र मौज ज़िन्‍दाबाद

आज़ादिए-वतन की तमन्‍नए-दिल नवाज़
ज़िन्‍दाँ में घुट के रह गई या दिल में मिस्‍ले-राज़
कहते थे जुर्म जिसको हुकूमत के हीलासाज़
तेरे अमल हो उसको मिली खिलअते-जवाज
अब ‘हक़’ है जिसका नाम रहा ‘ग़दर और फ़साद’
हिन्‍दोस्‍ताँ की फ़ौजे-ज़फ़र मौज ज़िन्‍दाबाद

ग़ालिब था बस्किसाहिरे-अफ़रंग का फ़सूँ
दो सौ बरस से था इल्‍मे-हिन्‍द सर नगूँ
तूने दयारे-ग़ैर में दिखला दिया कि यूँ
मर्दाने-कार करते हैं बातिल को ग़र्के़-ख़ूँ
बातिल हो ख़्वाह कोहे-गराँ ख़्वाह गर्दबाद
हिन्‍दोस्‍ताँ की फ़ौजे-ज़फ़र मौज ज़िन्‍दाबाद

 

Tilok Chand Mehroom
About the poet

Tilok Chand Mehroom

Tilok Chand Mehroom (1 July 1887 – 6 January 1966) was an Indian Urdu poet who was admired not only for his writings but also for his simple lifestyle and evident deep dislike of religious discrimination. Poetry There were no libraries in the schools of North…

View profile & all 6 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like