Selected Quotes
Poetry & Stories
कभी कभी खुद से बात करो - प्रदीप
कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो।अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो।
आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ - प्रदीप
कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो।अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो।
ऐ मेरे वतन के लोगों - प्रदीप
ऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नारा
साबरमती के सन्त - प्रदीप
ऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नारा
पिंजरे के पंछी रे - प्रदीप
ऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नारा
प्रदीप: Quick Answers
When was प्रदीप born?
प्रदीप was born on 6 September 1915. Associated place: बड़नगर, मध्य प्रदेश, भारत.
When did प्रदीप die?
प्रदीप passed away on 11 September 1998.
Where can I read प्रदीप's poetry?
Kavishala has 28 poems and stories by प्रदीप, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by प्रदीप
कभी कभी खुद से बात करो - प्रदीप
कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो।अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो।
आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ - प्रदीप
कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो।अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो।
ऐ मेरे वतन के लोगों - प्रदीप
ऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नारा
साबरमती के सन्त - प्रदीप
ऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नारा
पिंजरे के पंछी रे - प्रदीप
ऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नारा
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के - प्रदीप
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल केपासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
कभी धूप कभी छाँव - प्रदीप
सुख दुःख दोनों रहते जिसमें, जीवन है वो गाँवकभी धूप कभी छाँव, कभी धूप तो कभी छाँव
आज हिमालय की चोटी से - प्रदीप
आज हिमालय की चोटी से फिर हम ने ललकरा हैदूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है.
गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ - प्रदीप
गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लियेचार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये)
मेरे जीवन के पथ पर - प्रदीप
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौनपूनम की चाँदनी
हम तो अलबेले मज़दूर - प्रदीप
हम तो अलबेले मज़दूर गज़ब हमारी जादूगरीजादूगरी भाई जादूगरी गज़ब हमारी जादूगरी
न जाने आज किधर - प्रदीप
न जाने किधर आज मेरी नाव चली रेन जाने किधर आज मेरी नाव चली रे
Selected Quotes by प्रदीप (चुनिंदा उद्धरण)
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल केपासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल केऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नाराकभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो।अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो।सुख दुःख दोनों रहते जिसमें, जीवन है वो गाँवकभी धूप कभी छाँव, कभी धूप तो कभी छाँवआज हिमालय की चोटी से फिर हम ने ललकरा हैदूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है.गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लियेचार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिये)Videos on प्रदीप
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