सराप[1] हुस्ने-समधिन गोया गुलशन की क्यारी है
परी भी अब तो बाज़ी हुस्न में समधिन से हारी है
खिंची कंघी गुँथी चोटी जमी पट्टी लगा काजल
कमाँ अब्रू[2] नज़र जादू निगाह हर एक दुलारी है
जबीं[3] महताब[4] आँखें शोख़ शीरीं लब गोहर[5]-दन्दाँ[6]
बदन मोती दहन गुंचा अदा हँसने की प्यारी है
नया किमख़्वाब का लहँगा झमकते ताश की अँगिया
कुचें तसवीर-सी जिन पर लगा गोटा किनारी है
मुलायम पेट मख़मल-सा कली-सी नाफ़की[7] सूरत
उठा सीना सफ़ा पेडू अजब जोबन की नारी है
लटकती चाल मदमाता चले बिच्छू[8] को झनकाती
अदा में दिल लिए जाती अजब समधिन हमारी है
भरे जोबन पै इतराती झमक अँगिया की दिखलाती
कमर लहँगे से बल खाती लटक घूँघट की भारी है
परी भी अब तो बाज़ी हुस्न में समधिन से हारी है
खिंची कंघी गुँथी चोटी जमी पट्टी लगा काजल
कमाँ अब्रू[2] नज़र जादू निगाह हर एक दुलारी है
जबीं[3] महताब[4] आँखें शोख़ शीरीं लब गोहर[5]-दन्दाँ[6]
बदन मोती दहन गुंचा अदा हँसने की प्यारी है
नया किमख़्वाब का लहँगा झमकते ताश की अँगिया
कुचें तसवीर-सी जिन पर लगा गोटा किनारी है
मुलायम पेट मख़मल-सा कली-सी नाफ़की[7] सूरत
उठा सीना सफ़ा पेडू अजब जोबन की नारी है
लटकती चाल मदमाता चले बिच्छू[8] को झनकाती
अदा में दिल लिए जाती अजब समधिन हमारी है
भरे जोबन पै इतराती झमक अँगिया की दिखलाती
कमर लहँगे से बल खाती लटक घूँघट की भारी है








