बीत जाने के बाद

लीना मल्होत्रा रावलीना मल्होत्रा राव3 Oct 1968

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आज तुम लौट आए हो

मेरे हाथों में कोई कंपन नहीं

न ही दृष्टि में नमी

दिल की धड़कन भी अलसाई-सी यंत्रवत बज रही है

साफ़-साफ़ देख पा रही हूँ तुम्हें

वैसे नहीं

जैसे मैं देखना चाहती हूँ बल्कि वैसे जैसे कि तुम हो

सोच रही हूँ कि ऐसा क्या था तुम में जो

मैं दाँव पर लगा देती अपना जीवन

कैसे एक चित्र में जड़ हो गई थी मैं तुम्हारे साथ

जिसके फ़्रेम में समय नहीं घुस सकता था

प्यार ख़ुशबू का एक पुल बन गया था

जिस पर मैं तुम्हारे साथ एक अनंत यात्रा पर निकल चुकी थी

अब आए हो तो

बेवक़ूफ़ शब्द खोखले से बज रहे हैं

हों ठों की मुस्कान समझदारियों की भाप बनकर उड़ने को है

रुको

एक कप चाय पीकर जाना

अभी भी चाय में खौलता है पानी का पागलपन

नहीं यह प्रेम का नहीं आँच का दोष है

तब भी उसी का दोष था

आह! मुझे तुमसे नहीं

उन दिनों से प्रेम था

बहने से प्रेम था, उड़ने से प्रेम था, डूब जाने से प्रेम था

नहीं, स्वीकारना नहीं चाहती थी

तुम न आते तो क्या ही अच्छा था।

लीना मल्होत्रा राव
About the poet

लीना मल्होत्रा राव

सुपरिचित कवयित्री। स्त्रीवादी संवेदना-सरोकारों के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : लीना मल्होत्रा राव जन्म : 03/10/1968 | गुरुग्राम, हरियाणा कविताओं के सोशल मीडिया दौर में पहले-पहल सामने आईं सुपरिचित कवयित्री लीना मल्होत्रा राव का जन्म 3 अक्टूबर 1968 को गुड़गाँव, हरिय…

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