जिनकी माँएँ खो गईं तोप के दहानों में
जिनके बापों का न पता, न ठौर-ठिकाना
जो अब भी लड़ाई में हैं अपनी धरती के लिए
मैं हूँ उनकी औलाद
मैं नहीं देख पाया इतना साफ़
कि याद कर सकूँ
माँ-बाप का चेहरा
और जहाँ तक नाम का सवाल है
मुझे नफ़रत के साथ, वे फ़िलिस्तानी पुकारती है।








