फलो!
ग़रीब और कमज़ोर बच्चों के लिए
देखते ही बढ़कर पक जाया करो
फलो!
जब तुम महँगे बेचे जाओ
तो सड़ जाया करो
छूते ही। छूने न दिया जाए तो देखते ही।
फलो!
ग़रीब और कमज़ोर बच्चों के लिए
देखते ही बढ़कर पक जाया करो
फलो!
जब तुम महँगे बेचे जाओ
तो सड़ जाया करो
छूते ही। छूने न दिया जाए तो देखते ही।

लखनऊ में राजेश की आत्महत्या से पहलेहम बहुत सारे कवि-लेखक
जिसने भी लिया हो मुझसे बदलावह उसे दे जाए
पिछले पतझर में हम कितने रोशन थे जैसे उजाले के दो पेड़घास बड़ी होती है तो आपस में दोस्त हो जाती है
नए अनाज की ख़ुशबू का पुल पार करकेमैं तुम्हारे पास आऊँगा
कोलईं की शाख हिलीखिड़की के पर्दे से झोंकों की बात चली!