कोलईं की शाख हिली
खिड़की के पर्दे से झोंकों की बात चली!
धुप-धुप कर आँख मार लैंप, बुझा,
हर कोने, टेबल पर, कुर्सी पर
खुली हुई पुस्तक पर बैठ गया अंधकार!
माचिस नहीं मिल पाई
कमरे मैं फैल गया एक मात्र इंतज़ार
मनचाही नींद का
सपनों भरी मनचाही नींद का!
कोलईं की शाख हिली
खिड़की के पर्दे से झोंकों की बात चली!
धुप-धुप कर आँख मार लैंप, बुझा,
हर कोने, टेबल पर, कुर्सी पर
खुली हुई पुस्तक पर बैठ गया अंधकार!
माचिस नहीं मिल पाई
कमरे मैं फैल गया एक मात्र इंतज़ार
मनचाही नींद का
सपनों भरी मनचाही नींद का!

लखनऊ में राजेश की आत्महत्या से पहलेहम बहुत सारे कवि-लेखक
जिसने भी लिया हो मुझसे बदलावह उसे दे जाए
फलो!ग़रीब और कमज़ोर बच्चों के लिए
पिछले पतझर में हम कितने रोशन थे जैसे उजाले के दो पेड़घास बड़ी होती है तो आपस में दोस्त हो जाती है
नए अनाज की ख़ुशबू का पुल पार करकेमैं तुम्हारे पास आऊँगा