जब घाटी से देखा तो, सुंदर दिखता था
शिखर
अब शिखर पर हूँ तो ज़्यादा सुन्दर दिखती है घाटी
अपने से बाहर जहाँ से भी देखो
दूसरा ही सुन्दर दिखता है ।
जब घाटी से देखा तो, सुंदर दिखता था
शिखर
अब शिखर पर हूँ तो ज़्यादा सुन्दर दिखती है घाटी
अपने से बाहर जहाँ से भी देखो
दूसरा ही सुन्दर दिखता है ।

Leeladhar Jagudi is an Indian teacher, journalist and poet of Hindi literature. He is the author of several poetry anthologies including Natak Jari Hai and Shankha Mukhi Shikharon Par and is a recipient of the Sahitya Akademi Award, for his 1997 anthology, An…
View profile & all 15 Poems / Storiesरात वह हवा चली जिसे आँधी कहते हैंउसने कुछ दरवाजे भड़भड़ाए
पानी पीटता रहा, हवा तराशती रही चट्टान कोदरारों के भीतर गूँजती हवा कुछ धूल छोड़ आती रही हर बार
मेरा ईश्वर मुझसे नाराज़ हैक्योंकि मैंने दुखी न रहने की ठान ली
हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर हैहर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है
मैं वह ऊँचा नहीं जो मात्र ऊँचाई पर होता हैकवि हूँ और पतन के अंतिम बिंदु तक पीछा करता हूँ