लौट आ रे - कुँअर बेचैन

Kunwar BechainKunwar Bechain1 Jul 1942

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लौट आ रे !
ओ प्रवासी जल !
फिर से लौट आ !

रह गया है प्रण मन में
रेत, केवल रेत जलता
खो गई है हर लहर की
मौन लहराती तरलता
कह रहा है चीख कर मरुथल
फिर से लौट आ रे!

लौट आ रे !
ओ प्रवासी जल !
फिर से लौट आ !

सिंधु सूखे, नदी सूखी
झील सूखी, ताल सूखे
नाव, ये पतवार सूखे
पाल सूखे, जाल सूखे
सूखने अब लग गए उत्पल,
फिर से लौट आ रे !

लौट आ रे !
ओ प्रवासी जल !
फिर से लौट आ !

Kunwar Bechain
About the poet

Kunwar Bechain

Dr. Kunwar Bechain is a Hindi poet of India. He is a resident of Ghaziabad, Uttar Pradesh. Dr. Bechain was born in village Umri, District Moradabad, Uttar Pradesh on 1 July 1942. His actual name is Dr. Kunwar Bahadur Saxena. He worked as head of the Hindi dep…

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