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Poetry & Stories
संस्कृतम्
नबूद ओ बूद के मंज़र बनाता रहता हूँमैं ज़र्द आग में ख़ुद को जलाता रहता हूँ
कालिदास
नबूद ओ बूद के मंज़र बनाता रहता हूँमैं ज़र्द आग में ख़ुद को जलाता रहता हूँ
रति रैन विषै जे रहे हैँ पति सनमुख - कालीदास
रति रैन विषै जे रहे हैँ पति सनमुख,तिन्हैँ बकसीस बकसी है मैँ बिहँसि कै।
गढ़न गढ़ी से गढ़ी,महल मढ़ी से मढ़ी - कालीदास
गढ़न गढ़ी से गढ़ी,महल मढ़ी से मढ़ी,बीजापुर ओप्यो दलमलि सुघराई में.
चूमौं करकंज मंजु अमल अनूप तेरो - कालीदास
चुमौं करकंज मंजु अमल अनूप तेरो,रूप के निधान कान्ह!मो तन निहारि दै.
कालीदास: Quick Answers
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Poems & Stories by कालीदास
संस्कृतम्
नबूद ओ बूद के मंज़र बनाता रहता हूँमैं ज़र्द आग में ख़ुद को जलाता रहता हूँ
कालिदास
नबूद ओ बूद के मंज़र बनाता रहता हूँमैं ज़र्द आग में ख़ुद को जलाता रहता हूँ
रति रैन विषै जे रहे हैँ पति सनमुख - कालीदास
रति रैन विषै जे रहे हैँ पति सनमुख,तिन्हैँ बकसीस बकसी है मैँ बिहँसि कै।
गढ़न गढ़ी से गढ़ी,महल मढ़ी से मढ़ी - कालीदास
गढ़न गढ़ी से गढ़ी,महल मढ़ी से मढ़ी,बीजापुर ओप्यो दलमलि सुघराई में.
चूमौं करकंज मंजु अमल अनूप तेरो - कालीदास
चुमौं करकंज मंजु अमल अनूप तेरो,रूप के निधान कान्ह!मो तन निहारि दै.
हाथ हँसि दीन्हों भीति अंतर परसि प्यारी - कालीदास
हाथ हँसि दीन्हों भीति अंतर परसि प्यारी,देखत ही छकी मखि कन्हर प्रबीन की.
Selected Quotes by कालीदास (चुनिंदा उद्धरण)
नबूद ओ बूद के मंज़र बनाता रहता हूँमैं ज़र्द आग में ख़ुद को जलाता रहता हूँरति रैन विषै जे रहे हैँ पति सनमुख,तिन्हैँ बकसीस बकसी है मैँ बिहँसि कै।गढ़न गढ़ी से गढ़ी,महल मढ़ी से मढ़ी,बीजापुर ओप्यो दलमलि सुघराई में.चुमौं करकंज मंजु अमल अनूप तेरो,रूप के निधान कान्ह!मो तन निहारि दै.हाथ हँसि दीन्हों भीति अंतर परसि प्यारी,देखत ही छकी मखि कन्हर प्रबीन की.Videos on कालीदास
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