फूलदान से निकाल लेना
फूल एक मुरझाया-सा
जैसे करुणा की अपूर्व बदली का
छा कर भी न बरस पाना
नाव पर दाल-चावल लादे
वैतरणी के पार जाना
जैसे व्याकुल पक्षियों का
अस्ताचल के पार उतरना।
फूलदान से निकाल लेना
फूल एक मुरझाया-सा
जैसे करुणा की अपूर्व बदली का
छा कर भी न बरस पाना
नाव पर दाल-चावल लादे
वैतरणी के पार जाना
जैसे व्याकुल पक्षियों का
अस्ताचल के पार उतरना।

ओड़िया भाषा के सुपरिचित कवि-निबंधकार-स्तंभकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
View profile & all 14 Poems / Stories(शुरूआत होगी एक गुहार से)हे प्रभु, हे विश्व नियन्ता, हे विधाता
हम कविता का विरोध सिर्फ़कर सकते हैं कविता में,
तुम तो जानते हो मेरी अयोग्यताकहीं कुछ मिल भी गया हो तो
पानी की चमड़ी तलेकुईं की उँगलियों में
सोचने का वक़्त है कहाँकुछ कहना ही होगा