निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !
कल अधरों में
मुस्कान लिए आया था,
मन में अगणित
अरमान लिए आया था,
पर आज झर गया
खिलने से पहले ही,
साथी हैं बस
तन से लिपटे दो शूल !
निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !
निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !
कल अधरों में
मुस्कान लिए आया था,
मन में अगणित
अरमान लिए आया था,
पर आज झर गया
खिलने से पहले ही,
साथी हैं बस
तन से लिपटे दो शूल !
निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !

Gopaldas Neeraj (popularly known as Niraj or Neeraj; 4 January 1925 – 19 July 2018)[2] was an Indian poet and author of Hindi literature. He was also a poet of Hindi Kavi sammelan. He was born in the village of Puravali, near Mahewa in Etawah district in Utta…
View profile & all 33 Poems / Storiesअब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाएजिस में इंसान को इंसान बनाया जाए
हार न अपनी मानूँगा मैं !चाहे पथ में शूल बिछाओ
मधुर तुम इतना ही कर दो !यदि यह कहते हो मैं गाऊँ,
तुम गए चित्तचोर !स्वप्न-सज्जित प्यार मेरा,
है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिएजिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए