अफ़वाहों की पलटन

फ़रीद ख़ाँफ़रीद ख़ाँ

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अफ़वाहों की पलटन उतरी।

उसने घेर लिया पूरे मुहल्ले को।

रात का सन्नाटा और दरवाज़े पर लगाते हुए निशान,

अफ़वाहें खटखटा रही थीं लोकतंत्र का मकान।

नींद बहुत गहरी थी लोगों की।

सुबह जब वे उठे,

वे घिर चुके थे अफ़वाहों से।

फ़रीद ख़ाँ
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