अफ़वाहों की पलटन उतरी।
उसने घेर लिया पूरे मुहल्ले को।
रात का सन्नाटा और दरवाज़े पर लगाते हुए निशान,
अफ़वाहें खटखटा रही थीं लोकतंत्र का मकान।
नींद बहुत गहरी थी लोगों की।
सुबह जब वे उठे,
वे घिर चुके थे अफ़वाहों से।
अफ़वाहों की पलटन उतरी।
उसने घेर लिया पूरे मुहल्ले को।
रात का सन्नाटा और दरवाज़े पर लगाते हुए निशान,
अफ़वाहें खटखटा रही थीं लोकतंत्र का मकान।
नींद बहुत गहरी थी लोगों की।
सुबह जब वे उठे,
वे घिर चुके थे अफ़वाहों से।

सबसे पहले मैं माफ़ी माँगता हूँ हज़रत हौव्वा से।मैंने ही अफ़वाह उड़ाई थी कि उस ने आदम को बहकाया था
मैं उस समय की बात कर रहा हूँ जब कोयले के चूल्हे जलते थे,और छप्पर से धुँआ उठता था।
आसमान में टिम टिमाती नानी हँसती होंगी हमारे बचपने पर।हाँ!
जैसे-जैसे सूरज निकलता है,नीला होता जाता है आसमान।
कंस्ट्रक्शन साइट पर एक आदिवासी औरत पका रही थी रोटी।उसका बेटा रोटी खाने से कर रहा था इनकार।