Selected Quotes
Poetry & Stories
नया भारत - फ़हमीदा रियाज़
तुम बिल्कुल हम जैसे निकलेअब तक कहाँ छिपे थे भाई
आलम-ए-बर्ज़ख़ - फ़हमीदा रियाज़
ये तो बर्ज़ख़ है यहाँ वक़्त की ईजाद कहाँइक बरस था कि महीना हमें अब याद कहाँ
अब सो जाओ - फ़हमीदा रियाज़
अब सो जाओऔर अपने हाथ को मेरे हाथ में रहने दो
अबद - फ़हमीदा रियाज़
ये कैसी लज़्ज़त से जिस्म शल हो रहा है मेराये क्या मज़ा है कि जिससे है उज़्व-उज़्व बोझल
अक़्लीमा - फ़हमीदा रियाज़
अक़्लीमाजो हाबील की क़ाबील की माँ-जाई है
फ़हमीदा रियाज़: Quick Answers
When was फ़हमीदा रियाज़ born?
फ़हमीदा रियाज़ was born on 28 September 1946. Associated place: मेरठ, उत्तरप्रदेश, भारत.
When did फ़हमीदा रियाज़ die?
फ़हमीदा रियाज़ passed away on 21 September 2018.
Where can I read फ़हमीदा रियाज़'s poetry?
Kavishala has 63 poems and stories by फ़हमीदा रियाज़, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by फ़हमीदा रियाज़
नया भारत - फ़हमीदा रियाज़
तुम बिल्कुल हम जैसे निकलेअब तक कहाँ छिपे थे भाई
आलम-ए-बर्ज़ख़ - फ़हमीदा रियाज़
ये तो बर्ज़ख़ है यहाँ वक़्त की ईजाद कहाँइक बरस था कि महीना हमें अब याद कहाँ
अब सो जाओ - फ़हमीदा रियाज़
अब सो जाओऔर अपने हाथ को मेरे हाथ में रहने दो
अबद - फ़हमीदा रियाज़
ये कैसी लज़्ज़त से जिस्म शल हो रहा है मेराये क्या मज़ा है कि जिससे है उज़्व-उज़्व बोझल
अक़्लीमा - फ़हमीदा रियाज़
अक़्लीमाजो हाबील की क़ाबील की माँ-जाई है
चादर और चार-दीवारी - फ़हमीदा रियाज़
हुज़ूर, मैं इस सियाह चादर का क्या करूँगीये आप क्यूँ मुझ को बख़्शते हैं ब-सद इनायत
दिल्ली तिरी छाँव… - फ़हमीदा रियाज़
दिल्ली ! तिरी छाँव बड़ी क़हरीमिरी पूरी काया पिघल रही
एक औरत की हँसी - फ़हमीदा रियाज़
पथरीले कोहसार के गाते चश्मों मेंगूँज रही है एक औरत की नर्म हँसी
एक रात की कहानी - फ़हमीदा रियाज़
बड़ी सुहानी-सी रात थी वोहवा में अनजानी खोई-खोई महक रची थी
एक ज़न-ए-ख़ाना-ब-दोश - फ़हमीदा रियाज़
तुम ने देखी है कभी एक ज़न-ए-ख़ाना-ब-दोशजिस के ख़ेमे से परे रात की तारीकी में
मुक़ाबला-ए-हुस्न - फ़हमीदा रियाज़
कूल्हों में भँवर जो हैं तो क्या हैसर में भी है जुस्तुजू का जौहर
- फ़हमीदा रियाज़
कूल्हों में भँवर जो हैं तो क्या हैसर में भी है जुस्तुजू का जौहर
Selected Quotes by फ़हमीदा रियाज़ (चुनिंदा उद्धरण)
अब सो जाओऔर अपने हाथ को मेरे हाथ में रहने दोतुम बिल्कुल हम जैसे निकलेअब तक कहाँ छिपे थे भाईदिल्ली ! तिरी छाँव बड़ी क़हरीमिरी पूरी काया पिघल रहीहुज़ूर, मैं इस सियाह चादर का क्या करूँगीये आप क्यूँ मुझ को बख़्शते हैं ब-सद इनायतअक़्लीमाजो हाबील की क़ाबील की माँ-जाई हैये कैसी लज़्ज़त से जिस्म शल हो रहा है मेराये क्या मज़ा है कि जिससे है उज़्व-उज़्व बोझलVideos on फ़हमीदा रियाज़
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