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यह लो
एक छलनी है तुम्हारे पास
एक दिन बोली वहअच्छा अब चलती हूँ
यूँ हीउसके क़दमों की आहट
यह धरती जो उर्वरा हैस्वप्न उर्वरा, इच्छा उर्वरा
अहसासों का बस्ता अटारी पर रखा हैअलमारी में बंद पड़ी हैं इच्छाएँ
उदासी ने फिरबिखेर लिए हैं अपने बाल