उन्माद मेरे नहीं
तुम्हारे
अपने यौवन का था
जिसके रंग में
तुम खेले मुझसे
मैं जूझता रहा
तुम लूटते रहे
लूट की
इस चिर क्रिया में
लुट गया
जीवन का व्याकरण
उन्माद मेरे नहीं
तुम्हारे
अपने यौवन का था
जिसके रंग में
तुम खेले मुझसे
मैं जूझता रहा
तुम लूटते रहे
लूट की
इस चिर क्रिया में
लुट गया
जीवन का व्याकरण
