ब्रज श्रीवात्सव, poet
Sootradhar · Author

ब्रज श्रीवात्सव

ब्रज श्रीवात्सव

  • 4 Poems & Stories
  • 49.4K Reads

About ब्रज श्रीवात्सव

ब्रज श्रीवात्सव

Selected Quotes

इस तरह से घिराव हुआ यहाँ कापरछाईं के क़दम हैं इसी ओर
— ब्रज श्रीवात्सव
Read full
रोज़ाना मेरे पास आ बैठा करती एक सुगंधमैं उसे पढ़ाता उसका विज्ञान
— ब्रज श्रीवात्सव
Read full

More Poetry & Stories You May Like

दरिया-दिली से अब्र-ए-करम भी नहीं मिलादरिया-दिली से अब्र-ए-करम भी नहीं मिलालेकिन मुझे नसीब से कम भी नहीं मिला— मुनव्वर रानाकभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ़ नहीं देखाकभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ़ नहीं देखातुम्हारे बा'द किसी की तरफ़ नहीं देखा— मुनव्वर रानाअम्मी का चूल्हामैं उस समय की बात कर रहा हूँ जब कोयले के चूल्हे जलते थे,और छप्पर से धुँआ उठता था।— फ़रीद ख़ाँकुछ नहीं चाहने वाली लड़कीसोलह की यह लड़की दो-तीन साल पहले तकपेड़-पौधों पर रखती थी पाँव— ऐश्वर्य राजआंबेडकर“तुम्हारे दीन मुखों को देखकरकरुणा भरे स्वरों को सुनकर— बी. गोपाल रेड्डीमेरा और मेरी पृथ्वी का(लंबी कविता के कुछ अंश)वैसा ही हूँ, दुख मेरी गोद का बच्चा, बार-बार— हीरेन भट्टाचार्य