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ब्रज श्रीवात्सव
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ख़ुशी की बात है
दुख की बात है कि एक दोस्त ग़ुस्सा हुआख़ुशी की बात है अभी बाक़ी दोस्त मुझसे ख़ुश हैं
गुम हुई वह यकायक
रोज़ाना मेरे पास आ बैठा करती एक सुगंधमैं उसे पढ़ाता उसका विज्ञान
बरसात
पता नहीं कौन-सी नदी में डूबकर आई है हवारात तक सूखते ही नहीं उसके कपड़े
सब कुछ अच्छा बेअसर है
इस तरह से घिराव हुआ यहाँ कापरछाईं के क़दम हैं इसी ओर
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Poems & Stories by ब्रज श्रीवात्सव
ख़ुशी की बात है
दुख की बात है कि एक दोस्त ग़ुस्सा हुआख़ुशी की बात है अभी बाक़ी दोस्त मुझसे ख़ुश हैं
गुम हुई वह यकायक
रोज़ाना मेरे पास आ बैठा करती एक सुगंधमैं उसे पढ़ाता उसका विज्ञान
बरसात
पता नहीं कौन-सी नदी में डूबकर आई है हवारात तक सूखते ही नहीं उसके कपड़े
सब कुछ अच्छा बेअसर है
इस तरह से घिराव हुआ यहाँ कापरछाईं के क़दम हैं इसी ओर
Selected Quotes by ब्रज श्रीवात्सव (चुनिंदा उद्धरण)
इस तरह से घिराव हुआ यहाँ कापरछाईं के क़दम हैं इसी ओररोज़ाना मेरे पास आ बैठा करती एक सुगंधमैं उसे पढ़ाता उसका विज्ञानपता नहीं कौन-सी नदी में डूबकर आई है हवारात तक सूखते ही नहीं उसके कपड़ेदुख की बात है कि एक दोस्त ग़ुस्सा हुआख़ुशी की बात है अभी बाक़ी दोस्त मुझसे ख़ुश हैंVideos on ब्रज श्रीवात्सव
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