मास्टर जी

बीरेंद्र चट्टोपाध्यायबीरेंद्र चट्टोपाध्याय

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मास्टर जी, मेरे पतलून में कादा लगा है;

देखिए न, कान पकड़कर खड़ा हो गया हूँ बैंच पर;

माफ़ करें। व्याकरण की ग़लती पर डस्टर से मारकर बच्चों के सामने

और अपमानित न करें! लेखकों वाले आपके स्कूल में छात्र बनकर आया हूँ—

कविता की भाषा सीखने। पर क्लास में घुसते ही कादा लग जाता है पतलून में;

कविता-मास्टर आप, डस्टर फेंककर मारेंगे तो आपके ही जिस्म पर पड़ेगी धूल...

बीरेंद्र चट्टोपाध्याय
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