मास्टर जी, मेरे पतलून में कादा लगा है;
देखिए न, कान पकड़कर खड़ा हो गया हूँ बैंच पर;
माफ़ करें। व्याकरण की ग़लती पर डस्टर से मारकर बच्चों के सामने
और अपमानित न करें! लेखकों वाले आपके स्कूल में छात्र बनकर आया हूँ—
कविता की भाषा सीखने। पर क्लास में घुसते ही कादा लग जाता है पतलून में;
कविता-मास्टर आप, डस्टर फेंककर मारेंगे तो आपके ही जिस्म पर पड़ेगी धूल...








