About बालकृष्ण शर्मा नवीन
बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' (१८९७ - १९६० ई०) हिन्दी कवि थे। वे परम्परा और समकालीनता के कवि हैं। उनकी कविता में स्वच्छन्दतावादी धारा के प्रतिनिधि स्वर के साथ-साथ राष्ट्रीय आंदोलन की चेतना, गांधी दर्शन और संवेदनाओं की झंकृतियां समान ऊर्जा और उठान के साथ सुनी जा सकती हैं। आधुनिक हिन्दी कविता के विकास में उनका स्थान अविस्मरणीय…
Selected Quotes
Poetry & Stories
विप्लव गायन - बालकृष्ण शर्मा नवीन
==जन्म ==हिंदी साहित्य में प्रगतिशील लेखन के अग्रणी कवि पंडित बालकृष्ण शर्मा नवीन का जन्म सन् १८९७ में ग्वालियर जनपद के अर्न्तगत शुजालपुर गाँव में हुआ।
असिधारा पथ - बालकृष्ण शर्मा नवीन
ओ असिधारा-पथ के गामी!विकट सुभट तुम, अथक पथिक तुम कंटक-कीर्णित मग-अनुगामी
ओस बिंदु सम ढरके - बालकृष्ण शर्मा नवीन
हम तो ओस-बिंदु सम ढरकेआए इस जड़ता में चेतन तरल रूप कुछ धर के!
प्राप्तव्य - बालकृष्ण शर्मा नवीन
इस धरती पर लाना है,हमें खींच कर स्वर्ग
फागुन - बालकृष्ण शर्मा नवीन
अरे ओ निरगुन फागुन मास!मेरे कारागृह के शून्य अजिर में मत कर वास,
About बालकृष्ण शर्मा नवीन
बालकृष्ण शर्मा नवीन: Quick Answers
Who is बालकृष्ण शर्मा नवीन?
बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' (१८९७ - १९६० ई०) हिन्दी कवि थे। वे परम्परा और समकालीनता के कवि हैं।
When was बालकृष्ण शर्मा नवीन born?
बालकृष्ण शर्मा नवीन was born on 8 March 1897. Associated place: ग्राम शुजालपुर, ग्वालियर जिला, मध्य प्रदेश, भारत.
When did बालकृष्ण शर्मा नवीन die?
बालकृष्ण शर्मा नवीन passed away on 29 September 1960.
Where can I read बालकृष्ण शर्मा नवीन's poetry?
Kavishala has 42 poems and stories by बालकृष्ण शर्मा नवीन, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by बालकृष्ण शर्मा नवीन
विप्लव गायन - बालकृष्ण शर्मा नवीन
==जन्म ==हिंदी साहित्य में प्रगतिशील लेखन के अग्रणी कवि पंडित बालकृष्ण शर्मा नवीन का जन्म सन् १८९७ में ग्वालियर जनपद के अर्न्तगत शुजालपुर गाँव में हुआ।
असिधारा पथ - बालकृष्ण शर्मा नवीन
ओ असिधारा-पथ के गामी!विकट सुभट तुम, अथक पथिक तुम कंटक-कीर्णित मग-अनुगामी
ओस बिंदु सम ढरके - बालकृष्ण शर्मा नवीन
हम तो ओस-बिंदु सम ढरकेआए इस जड़ता में चेतन तरल रूप कुछ धर के!
प्राप्तव्य - बालकृष्ण शर्मा नवीन
इस धरती पर लाना है,हमें खींच कर स्वर्ग
फागुन - बालकृष्ण शर्मा नवीन
अरे ओ निरगुन फागुन मास!मेरे कारागृह के शून्य अजिर में मत कर वास,
भिक्षा - बालकृष्ण शर्मा नवीन
भर दो, प्रिय, भर दो अंतरतर,विश्व-वेदना के कल जल से
मधुमय स्वप्न रंगीले - बालकृष्ण शर्मा नवीन
बन-बनकर मिट गए अनेकों मेरे मधुमय स्वप्न रंगीलेभर-भरकर फिर-फिर सूखे हैं मेरे लोचन गीले-गीले।
मन मीन - बालकृष्ण शर्मा नवीन
मछली, मछली, कितना पानी? ज़रा बता दो आज,देखूँ, कितने गहरे में है मेरा जीर्ण जहाज़।
मेह की झड़ी लगी - बालकृष्ण शर्मा नवीन
मेह की झड़ी लगी नेह की घड़ी लगी।हहर उठा विजन पवन,
सदा चाँदनी - बालकृष्ण शर्मा नवीन
कुछ धूमिल-सी कुछ उज्ज्वल-सी झिलमिल शिशिर-चाँदनी छाईमेरे कारा के आँगन में उमड़ पड़ी यह अमल जुन्हाई।
साजन लेंगे जोग री - बालकृष्ण शर्मा नवीन
आज सुना है सखी, हमारे साजन लेंगे जोग, री,हमें दान में दे जाएँगे वे विकराल वियोग, री।
हम अनिकेतन - बालकृष्ण शर्मा नवीन
हम निकेतन, हम अनिकेतनहम तो रमते राम हमारा क्या घर, क्या दर, कैसा वेतन?
Selected Quotes by बालकृष्ण शर्मा नवीन (चुनिंदा उद्धरण)
ओ असिधारा-पथ के गामी!विकट सुभट तुम, अथक पथिक तुम कंटक-कीर्णित मग-अनुगामीहम तो ओस-बिंदु सम ढरकेआए इस जड़ता में चेतन तरल रूप कुछ धर के!कुछ धूमिल-सी कुछ उज्ज्वल-सी झिलमिल शिशिर-चाँदनी छाईमेरे कारा के आँगन में उमड़ पड़ी यह अमल जुन्हाई।बन-बनकर मिट गए अनेकों मेरे मधुमय स्वप्न रंगीलेभर-भरकर फिर-फिर सूखे हैं मेरे लोचन गीले-गीले।इस धरती पर लाना है,हमें खींच कर स्वर्गअरे ओ निरगुन फागुन मास!मेरे कारागृह के शून्य अजिर में मत कर वास,Videos on बालकृष्ण शर्मा नवीन
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