About बजरंग बिश्नोई
विलक्षण, किंतु अलक्षित कवि। ‘हरारत में तीसरी नदी’ प्रमुख कविता-संग्रह जन्म : 01/07/1944 | जालौन, उत्तर प्रदेश शिक्षा : एम. ए., कार्यक्षेत्र : उच्च शिक्षा योजना एवं प्रबंधन एवं हस्तनिर्मित काग़ज़ में शोध एवं विकास। रुचि-क्षेत्र : पेंटिंग एवं लेखन (कविता, कहानी, आलोचना एवं निबंध)। सभी महत्त्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं, ज…
Selected Quotes
Poetry & Stories
अप्रैल में ततैया
अप्रैल से वित्तवर्ष शुरू होतावित्तविहीन का चित्तवर्ष भी
मेरी नाव तैयार है
मेरी नाव तैयार हैबादवान कहीं-कहीं थोड़ा फटा है
रेल में किलकारी
रेल की खिड़की से क्या दिखता हैहमें तुम्हें नहीं
मधुमक्खियों का छत्ता हूँ
जीवन-राग के छूट गए सुरकभी उलाहना देने नहीं आए
कलकत्ता में प्रेम
अगर कोई कविता लिख रहा हैऔर कविता प्रेम पर
About बजरंग बिश्नोई
विलक्षण, किंतु अलक्षित कवि। ‘हरारत में तीसरी नदी’ प्रमुख कविता-संग्रह
जन्म : 01/07/1944 | जालौन, उत्तर प्रदेश
शिक्षा : एम. ए., कार्यक्षेत्र : उच्च शिक्षा योजना एवं प्रबंधन एवं हस्तनिर्मित काग़ज़ में शोध एवं विकास। रुचि-क्षेत्र : पेंटिंग एवं लेखन (कविता, कहानी, आलोचना एवं निबंध)। सभी महत्त्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं, जैसे : ‘धर्मयुग’, ‘ज्ञानोदय’, ‘कल्पना’, ‘लहर’, ‘माध्यम’, ‘नई धारा’, ‘समीक्षा’, ‘दस्तावेज़’, ‘समास’, ‘सदानीरा’ आदि में प्रकाशित होते रहे हैं। वर्ष 1967 में पहला कविता-संकलन प्रकाशित एवं प्रशंसित। वर्ष 1969 में ज्ञानोदय के श्रेष्ठ संचयन में सम्मिलित सबसे युवा कवि। बतौर चित्रकार भी 1962 से लगातार सक्रिय—(कला प्रदर्शनी एवं प्रकाशन)। अमूर्त अंकन में कैनवस के अलावा भी अन्य माध्यमों का प्रयोग। हस्तनिर्मित काग़ज़ की निर्माण प्रक्रिया में पहली बार विश्व पटल पर मशहूर पेंटर पाब्लो पिकासो व अन्य पेंटर्स की विभिन्न शैलियों को समाहित करके नए रूप व माध्यम प्रदान करने पर यूनेस्को द्वारा सम्मानित। विदेश में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व
बजरंग बिश्नोई: Quick Answers
Who is बजरंग बिश्नोई?
विलक्षण, किंतु अलक्षित कवि। ‘हरारत में तीसरी नदी’ प्रमुख कविता-संग्रह जन्म : 01/07/1944 | जालौन, उत्तर प्रदेश शिक्षा : एम.
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Poems & Stories by बजरंग बिश्नोई
अप्रैल में ततैया
अप्रैल से वित्तवर्ष शुरू होतावित्तविहीन का चित्तवर्ष भी
मेरी नाव तैयार है
मेरी नाव तैयार हैबादवान कहीं-कहीं थोड़ा फटा है
रेल में किलकारी
रेल की खिड़की से क्या दिखता हैहमें तुम्हें नहीं
मधुमक्खियों का छत्ता हूँ
जीवन-राग के छूट गए सुरकभी उलाहना देने नहीं आए
कलकत्ता में प्रेम
अगर कोई कविता लिख रहा हैऔर कविता प्रेम पर
कहीं तो रह गया हूँ
कहाँ-कहाँ रहाऔर कहाँ रह गया हूँ
प्लेटफ़ॉर्म नंबर आठ
वह उतर गया हैप्लेटफ़ॉर्म नंबर आठ पर
छोटी इ की मात्रा
मुझे नहीं मालूम थाकि इतना निर्दयी हूँ मैं
टूटना एक सकर्मक क्रिया है
लो अब टूटता हूँटुकुर-टुकुर क्या देखते हो
ऊँट की हँसी
ऊँट को क़ुर्बानी के लिए लाया गयाचला आया चुपचाप क़ुर्बानी-स्थल पर
Selected Quotes by बजरंग बिश्नोई (चुनिंदा उद्धरण)
लो अब टूटता हूँटुकुर-टुकुर क्या देखते होमेरी नाव तैयार हैबादवान कहीं-कहीं थोड़ा फटा हैऊँट को क़ुर्बानी के लिए लाया गयाचला आया चुपचाप क़ुर्बानी-स्थल परमुझे नहीं मालूम थाकि इतना निर्दयी हूँ मैंजीवन-राग के छूट गए सुरकभी उलाहना देने नहीं आएअप्रैल से वित्तवर्ष शुरू होतावित्तविहीन का चित्तवर्ष भीVideos on बजरंग बिश्नोई
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