काठ का घोड़ा लाने लगए
पिता नहीं आए
सोने की चिड़िया लाने गए पिता नहीं आए
नीले सपने लाने गए पिता नहीं आए
दादी की पुतली और बाबा के ढाँढस
मेरे पिता अब तक नहीं आए
कत्थई गिलहरी लाने गए
पिता नहीं आए
माँ की फहराती साड़ी के सबुज रंग मेरे पिता
अब तक नहीं आए
हरा तोता बनकर गए पिता नहीं आए
सपने का मृग लाने गए पिता नहीं आए
पिता आए तो उनकी लाश आई
तृतीय श्रेणी के डब्बे में
शौचालय के पास की थोड़ी जगह में
लिटाई हुई।








