कहते हैं आशिक़ों की कोई जाति नहीं होती
लेकिन तुम तो आशिक़ों में भी सवर्ण निकले कबीर सिंह!
उन दलितों का क्या जो रिश्ते बचाने की ख़ातिर
आत्मसम्मान तक गिरवी रख देते हैं
यहाँ तक कि बेदख़ल हो जाते हैं अपने आपसे
पीओगे उसके हाथ का पानी
फूँकोगे साथ बैठ सिगरेट?
कल्पना करो कि प्रीत की नींव रखने वाली प्रीति को
समय ने अगवा कर लिया हो
बाँध दिया हो उसके कलेजे पर पत्थर
तुम दूर से महसूस करो
कि वह पल-पल मर रही तेरे बिना
और पास आओ तो कहे
कि नफ़रत करती हूँ तुमसे कबीर
तुम हार जाओगे कबीर सिंह
हार जाओगे
हार यह नहीं कि वह तुमसे प्यार नहीं करती
हार यह कि वह तुमसे प्यार नहीं करके भी प्यार करती है
प्रेम में साथ रहना तो
दर्शकों का दिल जीतने में सक्षम
एक डेढ़ मिनट का ट्रेलर मात्र है
फ़िल्म की अस्ल शुरुआत तो बिछड़ने के बाद होती है
ये जात-पात, ऊँच-नीच की खाई, व्यस्त दिनचर्या और उस पर भी आत्ममुग्धता
ये सबके सब विलेन हैं
अखाड़े में दंड पेल रहे बड़ी-बड़ी मूँछ वाले विलेन
किस-किससे जीतोगे कबीर सिंह
तुम हार जाओगे
जीतना चाहते हो कबीर सिंह, मगर किससे?
वे चाहते हैं हर दफ़े तुम ऐसा करो
ताकि ढोंगियों के शिकारी कुत्ते नोच खाए तुम्हें
किस मर्दानगी की बात कर रहे हो कबीर सिंह?
लंगोट में मृदंग लटका कर घूमने से कोई इश्क़ में
गवैया नहीं बन जाता!
मर्दानगी तो लोहे पर धार चढ़ाने की प्रक्रिया है
कृषि-ऋण तले दबे किसानों के पसीने से आ रही मिट्टी और गोबर की ख़ूशबू है मर्दानगी
मर्दानगी है समय के क़ैद से प्रीति को रिहा करना
मर्दानगी है प्रेम-प्रेम-प्रेम समय से परे—
मर्दानगी है क़यामत की बातें क़यामत के बाद भी
तुम्हारे चेहरे पर धूल फाँक रही ख़ानाबदोश दाढ़ी
दिल के कटोरे में पड़ी रहमत की भीख है
तुम इससे हमदर्दी के सिवाय और कुछ नहीं ख़रीद सकते
और प्रेम तो समुद्र-मंथन की प्रक्रिया है
देवताओं द्वारा छला जाएगा अमृत का घड़ा
और तुम्हें दानव घोषित कर दिया जाएगा
और तुम हो कि स्मृतियों की चिलम फूँक
धुएँ से बनाओगे उसकी तस्वीर
लेकिन गले मिलकर माफ़ी तक नहीं माँग सकते
ड्रग्स और शराब में डूब भले कितने ही अच्छे
तैराक हो जाओ
लेकिन डूब मरोगे हर दफ़े उसकी हथेली में
जब कोहरे के उस पार दूर कहीं से
मुस्कुराती हुई वह बुदबुदाएगी :
कबीर क बीर क बी र...








