नदी के पार नदी - अर्पण कुमार

अर्पण कुमारअर्पण कुमार14 Sept 1977

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भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।
प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।
सेवा करी पलु चसा न विछुड़ा जन नानक दास तुमारे जीउ।।4।।
हउ घोली जीउ घोलि घुमाई जन नानक दास तुमारे जीउ।।1।।
अर्पण कुमार
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