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Poetry & Stories
नदी के पार नदी - अर्पण कुमार
भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।
जागना - अर्पण कुमार
कोई तड़के सुबह तो कोईदिन चढ़े जगा है
शासको, तुम हार रहे हो - अर्पण कुमार
आख़िर कब तक तुम हमें ठगतेऔर कोई कब तक चुप और निष्क्रिय
बीमारी और उसके बाद - अर्पण कुमार
कितना कुछ टूट्ने लगता हैशरीर और मन के अन्दर
मैं कुछ नहीं हूँ - अर्पण कुमार
मैं कुछ नहीं हूँऔर अपने इस कुछ नहीं को
अर्पण कुमार: Quick Answers
When was अर्पण कुमार born?
अर्पण कुमार was born on 14 September 1977. Associated place: पटना, बिहार.
Where can I read अर्पण कुमार's poetry?
Kavishala has 59 poems and stories by अर्पण कुमार, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by अर्पण कुमार
नदी के पार नदी - अर्पण कुमार
भागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।
जागना - अर्पण कुमार
कोई तड़के सुबह तो कोईदिन चढ़े जगा है
शासको, तुम हार रहे हो - अर्पण कुमार
आख़िर कब तक तुम हमें ठगतेऔर कोई कब तक चुप और निष्क्रिय
बीमारी और उसके बाद - अर्पण कुमार
कितना कुछ टूट्ने लगता हैशरीर और मन के अन्दर
मैं कुछ नहीं हूँ - अर्पण कुमार
मैं कुछ नहीं हूँऔर अपने इस कुछ नहीं को
आर्ट्स फैकल्टी - अर्पण कुमार
एक बड़ा सा समूह थाकुछ लोग मौक़े-बेमौक़े
कसती हथेली - अर्पण कुमार
हथेलीजो महसूस हो रही है तुम्हें
तारीख़ों में क़ैद ज़िन्दगी - अर्पण कुमार
इन दिनोंमेरी उदास और हताश आँखें
बुआ को सोचते हुए - अर्पण कुमार
वह विधवा थीलेकिन उसके पास
नहीं दिया हक़ - अर्पण कुमार
मैंने किसी को नहीं दिया हक़कि कोई प्रमाणपत्र दे मुझे
यात्रा - अर्पण कुमार
किसी से मिलने याकिसी के यहाँ जाना
कोरे सम्बन्ध - अर्पण कुमार
अतीत के कोरेसंबंधों के सूत्र
Selected Quotes by अर्पण कुमार (चुनिंदा उद्धरण)
मैंने किसी को नहीं दिया हक़कि कोई प्रमाणपत्र दे मुझेअतीत के कोरेसंबंधों के सूत्रआख़िर कब तक तुम हमें ठगतेऔर कोई कब तक चुप और निष्क्रियकोई तड़के सुबह तो कोईदिन चढ़े जगा हैइन दिनोंमेरी उदास और हताश आँखेंभागु होआ गुरि संतु मिलाइिआ।।प्रभु अबिनासी घर महि पाइिआ।।Videos on अर्पण कुमार
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