बदलाव - अनिल जनविजय

अनिल जनविजयअनिल जनविजय28 Sept 1957

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जब तक मैं कहता रहा
जीवन की कथा उदास
उबासियाँ आप लेते रहे
बैठे रहे मेरे पास

पर ज्यों ही शुरू किया मैं ने
सत्ता का झूठा यश-गान
सिर-माथे पर मुझे बैठाकर
किया आप ने मेरा मान

2004 में रचित
अनिल जनविजय
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अनिल जनविजय

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