आँखें बहुत अँधेरे में भी
देख सकती हैं
मगर
बहुत उजाले में नहीं
हवाएँ अजनबी उँगलियों की तरह
छू रही है
पहचान भी एक नस्ल है
सोने और जागने के बीच
सब कुछ मद्धम हो जता है।
आँखें बहुत अँधेरे में भी
देख सकती हैं
मगर
बहुत उजाले में नहीं
हवाएँ अजनबी उँगलियों की तरह
छू रही है
पहचान भी एक नस्ल है
सोने और जागने के बीच
सब कुछ मद्धम हो जता है।

सुपरिचित कवयित्री। कविताओं में उपस्थित संगीतात्मक वैभव के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : अजंता देव जन्म : 31/10/1958 | जोधपुर, राजस्थान अजंता देव का जन्म जोधपुर के एक प्रवासी बंगाल परिवार में हुआ। उनकी उच्च शिक्षा राजस्थान विश्वविद्यालय से पूरी हुई। शास्त्रीय संग…
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